अंदमान निकोबार में क्रांतिकारियों को हथकड़ी बांधकर कोड़े लगते हुए।
पीछे कोल्हू चलते क्रांतिकारियों का मॉडल ..जितना एक बैल निकल सकता है उससे अधिक तेल उन्हें निकलना पड़ता था।..
सेल्लुलर जेल के गलियारे में जो आज से 70 वर्ष पहले तक भारत माता की जय तथा वन्दे मातरम के नारों से गूंजता था।.
वीर सावरकर की कोठरी के बाहर।.
