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28 अप्रैल 2008
सीएनएन-आईबीएन
नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि कांग्रेसी सांसद एम.के. सुब्बा द्वारा चुनाव आयोग कार्यालय में दिया गया जन्म प्रमाण-पत्र फर्जी है।
ज्ञात हो कि कांग्रेसी सांसद सुब्बा अपनी नागरिकता को लेकर लम्बे अर्से से संदेह के घेरे में हैं।
सीबीआई ने अदालत में कहा कि सुब्बा, जो असम के तेजपुर से सांसद हैं, ने चुनाव आयोग को फर्जी प्रमाण-पत्र जमा किए। साथ ही इन कागजातों में आधारहीन जानकारी दाखिल की गई है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुब्बा को जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्तों की मोहलत दी है।
मोनी कुमार कांग्रेस का ‘मनीबैग’
सीएनएन-आईबीएन ने पिछले साल लगातार खबरें दिखाई थी और यह खुलासा किया था कि किस तरह से असम के ‘लॉटरी सामंत’ एम.के. सुब्बा ने अपना जन्म स्थान छुपाया है। सुब्बा पर आरोप है कि वे एक नेपाली नागरिक हैं। साथ ही सुब्बा एक नेपाली नागरिक की हत्या के दोषी भी हैं।
सीएनएन-आईबीएन के विशेष जांच दल ने यह खुलासा किया था कि मोनी कुमार सुब्बा नेपाल से भागकर आए हैं और यहां आने के बाद उन्होंने अपनी पहचान छुपा रखी थी। उन्होंने अपना नाम मणि राज लिम्बो से बदलते हुए मोनी कुमार सुब्बा कर लिया था।
लिम्बो नहीं, मोनी कुमार सुब्बा हूं
लेकिन सांसद महोदय बार-बार यही दावा कर रहे हैं कि उनका जन्म दार्जिलिंग में हुआ है और उनके माता-पिता सिक्कम से यहां आए थे।
सुब्बा से संबंधित ऐसी खबरें सामने आने के बाद सीबीआई ने सीएनएन-आईबीएन से इस मामले की जांच के लिए सबूत मांगे थे और जांच शुरु कर दी थी।
सुब्बा मामला: सीबीआई को मोहलत
http://thatshindi.oneindia.in/news/2009/04/06/1238994802.html
असम के सबसे धनी प्रत्याशी हैं सुब्बा
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अपने नामांकन के समय प्रस्तुत शपथ पत्र में सुब्बा ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है जिसमें 56 करोड़ रुपये का निवेश और नकदी दिखाई गई है। इस राशि में से अधिकांश शेयर बाजार में निवेश की गई है।
सुब्बा और उनकी दोनों पत्नियों ज्योति लिंबू और तिलमाया चोंग के पास कुल मिलाकर 1.85 करोड़ रुपये मूल्य के सोने और हीरे के जेवरात हैं।
सुब्बा ने आईएएनएस से कहा, "मुझे यकीन है कि मैं जीत हासिल करूंगा क्योंकि मेरे लोकसभा क्षेत्र के लोग मुझसे स्नेह करते हैं और मैंने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम किया है।"
उल्लेखनीय है कि सुब्बा की नागरिकता के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस समय जांच कर रही है।
यह जांच उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी बिरेंद्र नाथ सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर की जा रही है। सिंह ने आरोप लगाया था कि सुब्बा नेपाली नागरिक हैं और हत्या के मामले में सजायाफ्ता भी हैं।
सुब्बा ने 12 वीं लोकसभा के लिए अपने नामांकन में अपना जन्म स्थान तेजपुर व जन्मतिथि 16 मार्च 1951 बताई थी जबकि 14 वीं लोकसभा के नामांकन में उन्होंने अपना जन्मस्थान दार्जीलिंग (पश्चिम बंगाल) व जन्मतिथि 16 मार्च 1958 दर्शाई थी।
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4399315/

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। नागरिकता विवाद में फंसे सांसद मणिकुमार सुब्बा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो [सीबीआई] ने सुप्रीमकोर्ट में कहा है कि सुब्बा द्वारा उपलब्ध कराए गए जन्म संबंधी दस्तावेज असली नहीं हैं। उसने यह बात सुप्रीमकोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में कही है। कोर्ट ने सुब्बा को इस रिपोर्ट का जवाब देने का निर्देश दिया है।
ब्यूरो ने सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर सुब्बा की नागरिकता मामले की जांच कर यह रिपोर्ट दी है। अब सुब्बा के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।
गौरतलब है, वीरेन्द्रनाथ सिंह ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर सांसद सुब्बा की नागरिकता पर सवाल उठाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुब्बा भारतीय नागरिक नहीं हैं, बल्कि मणिराज लिंबो नाम के नेपाली नागरिक हैं। वह एक आपराधिक मामले में नेपाल की अदालत से दोषी करार दिए जा चुके हैं और बाद में भाग कर भारत आ गए। आरोप है कि उन्होंने भारत आकर अपना नाम मणिराज लिंबो से बदल कर मणिकुमार सुब्बा कर लिया है। याचिका में कोर्ट से जांच करा सुब्बा की पहचान पता लगाने की मांग की गई है। इन आरोपों पर ही सुप्रीमकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने कहा कि सीबीआई ने जांच कर सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल की है। कोर्ट उस पर संज्ञान ले और रिपोर्ट की प्रति पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए ताकि वे उसका जवाब दे सकें।
मुख्य न्यायाधींश केजी बालाकृष्णन की पीठ ने रिपोर्ट की प्रति तो संबंधित पक्षकारों को नहीं उपलब्ध कराई लेकिन सुब्बा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से इतना जरूर कहा कि रिपोर्ट उनके मुवक्किल के खिलाफ आई है। पीठ ने कहा, रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि सुब्बा द्वारा उपलब्ध कराया गया जन्मतिथि प्रमाण पत्र असली नहीं है। अब सुब्बा को इस रिपोर्ट पर जवाब देना है।
http://hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=view&id=16067&Itemid=134
| एक सुब्बा पर क्यों मेहरबान है सरकार? | ![]() | ![]() |
| खबरें | मीडिया डेस्क | बुधवार , 27 जुलाई 2011 | |
| बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण से कहीं ज्यादा गंभीर आरोप असम से कांग्रेस के पूर्व सांसद एम. के. सुब्बा पर हैं। काँग्रेसी सांसद सुब्बा की भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाते हुए सीबीआई चार्जशीट तक दायर कर चुकी है। इसके बावजूद सिर्फ एफआईआर के बाद बालकृष्ण का पासपोर्ट रद्द कराने पर आमदा सीबीआई ने सुब्बा का पासपोर्ट रद्द कराने की कोई कोशिश नहीं की है। इससे सीबीआई ने साबित कर दिया है कि वह स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने वाला संगठन है। सीबीआई ने अभी तक बालकृष्ण की भारतीय नागरिकता पर उंगली नहीं उठाई है। उनपर केवल पासपोर्ट ऑफिस में जमा की गईं शैक्षिक डिग्रियों के फर्जी होने के प्रमाण हैं। वहीं, सुब्बा के मामले में सीबीआई ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर उनके भारतीय नागरिक नहीं होने का प्रमाण पेश किया है। इसके बावजूद आज तक सीबीआई ने सुब्बा का पासपोर्ट रद्द करने के लिए विदेश मंत्रालय से अनुरोध करने की जरूरत नहीं समझी। सीबीआई की चार्जशीट के बावजूद सुब्बा न सिर्फ अपना बिजनेस आराम से चला रहे हैं, बल्कि एक पूर्व सांसद को मिलने वाले सुविधाओं का लाभ भी ले रहा है। इस मामले में सीबीआई का दोहरापन इस बात से भी साफ हो जाता है कि बालकृष्ण के फर्जी पासपोर्ट में तत्काल कार्रवाई शुरू हो गई लेकिन सुब्बा के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में एक दशक से भी ज्यादा समय लग गया। लंबे समय तक सुब्बा के मामले में निष्क्रिय रहने पर सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गंभीरता से जाँच शुरू करनी पड़ी। बाद में अदालत के निर्देश पर ही उसने चार्जशीट भी दाखिल की। Related items | |
http://asbmassindia.blogspot.com/2011/07/blog-post_2549.html
Sunday, May 4, 2008
सांसद सुब्बा की जेल यात्रा तय

सांसद सुब्बा की जेल यात्रा तय
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 4 मई-कांग्रेस सांसद मणि कुमार सुब्बा का जालसाजी और देशद्रोह के आरोप में जेल जाना तय है। देखना यह है कि असम, बंगाल, दिल्ली और अन्य प्रदेशों के कितने बड़े नेता और बहुत बड़े और वर्तमान और भूतपूर्व अधिकारी इस जाल में फंसते हैं।
मणि कुमार सुब्बा को सीबीआई की खोज रपट का जवाब अगले एक महीने में देना है लेकिन वे मीडिया के जरिए सीबीआई को गालियां देने पर तुल गए है। एक एनआरआई द्वारा चलाई जा रही न्यूज एजेंसी का इस्तेमाल करके सुब्बा ने कहा कि उन पर नेपाल के जिस अपराधी मणि कुमार लिंबो होने का आरोप लगाया जा रहा है वह आदमी 1982 तक नेपाल की जेल में था और आज भी जिंदा है। सीबीआई के अधिकारी कांग्रेस सांसद सुब्बा के इस विचित्र बयान पर दुखी हैं और चकित भी। उनका सवाल है कि अगर सुब्बा को इतने वर्षो से यह जानकारी थी तो वे अपने बचाव में अब जा कर क्यों बोल रहे हैं। सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि सुब्बा अपने पैसे के दम पर नेपाल का कोई भूतपूर्व अपराधी मणि कुमार लिंबो बना कर खड़ा कर दें और अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन पर जालसाजी का मुकदमा और गंभीर हो जाएगा। इस बीच सुब्बा की कई पत्नियों में एक ने भी उनके खिलाफ बयान दे दिया है और सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्बा के चुनाव क्षेत्र असम के तेजपुर से एक और याचिका जामिनी कुमार वैश्य ने डाली है जिसके अनुसार सुब्बा का व्यक्तित्व शुरू से आखिर तक फर्जी है। उनके जन्म प्रमाण पत्र, तथाकथित शिक्षा रिकॉर्ड और बार बार बदलते रहे इसका सुबूत है। वैश्य की याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची में सुब्बा का नाम भी जाली है। तेजपुर के जिस मतदान केंद्र नंबर 21 पर सुब्बा का नाम सूची में होना बताया गया है वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 537 नंबर पर खत्म हो जाती है लेकिन सुब्बा का मतदाता नंबर 630 है। याचिका के अनुसार 28 अगस्त 1971 को अपनी चचेरी बहन काली माई की हत्या के आरोप में केस नंबर 201 में उम्रकैद की सजा दी गई थी। तेपलेजुम जिला अदालत द्वारा दी गई सजा की पुष्टि 29 नवंबर 1972 को नेपाल के सर्वोच्च न्यायाल ने कर दी थी और बाद में नेपाल नरेश के पास अपील की गई थी जो नामंजूर हो गई थी।
सीबीआई के अनुसार सुब्बा और लिंबो नेपाल की ईलाम जेल से ईलाम अस्पताल ले जाते वक्त फरार हो कर भारत आ गया इस बात की पुष्टि सुब्बा की दूसरी पत्नी कर्मा कनु ने भी की है। सुब्बा के भाई संजय राज सुब्बा ने माफी की अपील नेपाल नरेश के पास की थी और यही यह बताने के लिए काफी है कि मणि कुमार लिंबो एक ही व्यक्ति हैं। इसके अलावा सुब्बा पर नागालैंड, असम और मेघालय लॉटरियों के कुल मिला कर 25 हजार करोड़ रुपए और उत्तर प्रदेश में 35 सौ करोड़ रुपए व्यापार के टैक्स के तौर पर हजम कर जाने का आरोप है।
सुब्बा ने लोकसभा का नामंकन करते समय अपनी हैसियत सिर्फ 20 करोड़ रुपए की बताई है, जबकि सिर्फ उसका दिल्ली का फार्महाउस दो सौ करोड़ का है। कांग्रेस में सुब्बा के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है। असम के गृह मंत्री ने उनका इस्तीफा मांगा है और आज उनके इलाके तेजपुर में उनके पुतले जलाए गए। सुब्बा बहुत बड़ी आफत में हैं और देखना यह है कि वे अपने साथ कितने अधिकारियों और राजनेताओं को ले कर डूबते हैं।
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 29 अप्रैल-कांग्रेस के बदनाम लोकसभा सदस्य मणिकुमार सुब्बा के खिलाफ सीबीआई ने भले ही अपनी रपट दे दी हो और उन्हें भारत का नागरिक मानने से भी इनकार कर दिया हो लेकिन सुब्बा ने आज साफ कर दिया कि वे सीबीआई को देश की प्रीमियम जांच एजेंसी की बजाय सरकारी नौकर मानते हैं।
कांग्रेस द्वारा अनपढ़ घोषित सुब्बा की ओर से आज सीबीआई मुख्यालय में अंग्रेजी में लिखी हुई एक चिटठी पहुंची जिसमें साफ शब्दों में निर्देश दिया गया था कि सीबीआई अपने वे आधार बताए जिनको उसने सर्वोच्च न्यायालय के सामने दी गई रपट में इस्तेमाल किया। आपको याद होगा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्बा को सीबीआई जांच रपट का जवाब देने के लिए एक महीने का समय दिया है और उसमें से तीन दिन निकल चुके हैं।
सुब्बा दिल्ली में एक तालकटोरा रोड पर रहते हैं और उनका एक बड़ा फार्महाउस ही दिल्ली में है। सीबीआई अधिकारियों को आशंका है कि वे सच खुल जाने के बाद देश छोड़ कर भाग सकते हैं और इसीलिए सीबीआई अधिकारियों ने उन पर निगरानी रखने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमति मांगने का फैसला किया है। इन अधिकारियों के मुताबिक सुब्बा आम तौर पर अपने सरकारी निवास पर नहीं रहते हैं और कहां कहां राते बिताते है यह उनके स्टाफ को भी नहीं पता होता है।
सुब्बा ने अब कांग्रेस को ब्लेकमेल करना शुरू कर दिया है। एक जमाने में उनके बंगले में मेहमान रहे एक भूतपूर्व मंत्री और वर्तमान सांसद के अनुसार सुब्बा ने उन्हें फोन करके कहा है कि अगर ऐसे मौके पर उनकी मदद नहीं की गई तो वे जिन जिन नेताओं को उन्होंने आर्थिक मदद दी है वे उन सबका खुलासा कर देगे। इसके अलावा उत्तर पूर्व की जिन पांच सरकारों ने सुब्बा पर सैकड़ों करोड़ रुपए हजम कर जाने के मामले दर्ज किए हैं, उन्हें भी सुब्बा कोई जवाब देने से इनकार कर रहे हैं। असम सरकार का नोटिस ले कर आए एक अधिकारी को तो कल ही बुरी धमका कर भगा दिया गया। सर्वोच्च न्यायालय सीबीआई के जांच पत्र का जवाब मिलने के बाद फैसला करेगा कि सुब्बा के अतीत के बारे म
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भवदीय,
राकेश कुमार
मुख्य केंद्रीय प्रभारी,
क्या आपने आज भ्रष्टाचार मिटाने व कालाधन वापिस लानेके लिए कम से कम १०० मेल भेजी,
क्या आपने आज देश को बचाने के लिए
कम से कम १० एस ऍम एस भेजे.
अगर नहीं , तो आइये अभी करें,



मै युवा जाग्रति और भारत स्वाभिमान आन्दोलन के संगठन में आप सभी युवायों से सहायता करने के लिए प्रार्थना करता हूँ, उच्च एवं आत्मचेतना से युवक सिर्फ कार्य ही नहीं करेगा,कल्पना भी करेगा,केवल ध्वंस ही नहीं वरन निर्माण भी करेगा ,वह वहां भी सफल होगा, जहाँ कही और कोई सफल नहीं हो पायेगा,युवा आपके लिए नवभारत का निर्माण करेगा, आइये युवाओं को एक नई दिशा दें जो उन क्रन्तिकारी शहीदों की राष्ट्रभक्ति को युवाओं में फिर जगा दे और भारत माँ की कोख से जन्मा प्रत्येक युवा,आज फिर उस माँ का कर्ज उतार सके और अपनी भारत माँ को भ्रष्टाचार ,जातिवाद,आतंकवाद ,नक्सलवाद और विदूषित राजनीती की भयंकरतम अंधकारमय गुलामी से फिर से आज़ाद करा सके
जवाब देंहटाएं"वन्देमातरम"
देश अब रामदेव भरोसे
जवाब देंहटाएं.by Ashit Pathak on Sunday, August 7, 2011 at 10:45pm.यह देश और देश के भ्रष्ट देश चलाने बाले इनका जमीर आत्मा,सब कुछ पैसा है,आज बिडम्बना है की जो देश की सत्ता संभाले हैं बो तो लूट रहे हैं देश को और जो विपक्ष है वो केवल उस लूट के विरोध का दिखावा कर रही है, महान क्रन्तिकारी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने कहा था की अगर आजादी की बाद इस कांग्रेस के चाटुकार और सत्ता के लोभी लोगो के पास सत्ता गई तो इस देश का वर्वाद होने से कोई नहीं बचा सकता क्योंकि वो गाँधी जी को घेरे रहने वाले चाटुकारों की नीयत समझ गए थे आज वो बात सत्य हो गयी पहले नेहरु ने सत्ता की चाहत में देश बटवाया,लाखो बेगुनाह लोगो के खून से तिलक करवा यह सत्ता नेहरु ने हासिल की और आज उनके वंशज फिर करोडो गरीबों का खून चूस कर देशभक्तों का खून वहा कर इस देश की सत्ता पर काबिज रहना चाहतें है और अगर उनके खिलाफ कोई आवाज उठे तो उसे बेरहमी से कुचलना चाहतें हैं, जिन्होंहे इस देश की संस्कृति को छिन्न भिन्न करने की ठानी है, आज भारत बहुत मुश्किल में है,जैसे सोनिया के सिपहसलार दिग्विजय और सिब्बल ने पूज्य महाराज रामदेव जी का अपमान किया ऐसे राष्ट्र संत का अपमान सुनकर यह देश चुप क्यों है ,मै सावन के कांवरियों को देख सोंचता हूँ की यह जो आस्था की भेड़ चाल जो भगवान् शंकर के लिए है सब एक होकर शिव दर्शन को जातें हैं कोई भेद भाव नहीं कोई जातिवाद नहीं तो फिर देश के लिए क्यों नहीं लोग एक होते ,क्रिकेट के खेल में देश एक दीखता है, यह देश के लूटेरो के खिलाफ देश एक क्यों नहीं होता ,आज सारी पार्टियों का अपना अपना वोट बैंक है किसी का जाती के आधार पर किसी का धर्म के आधार पर, मैं पूंछता हूँ कि राष्ट्र भक्ति के आधार पर राष्ट्र को लूटने वालो के खिलाफ देश एक क्यों नहीं होता, यह नेता चाहे किसी पार्टी के हो, इनका एक ही लक्ष्य देश के लोगो को बाँट कर पथभ्रमीत कर देश को लूट कर अपनी तिजोरियों को भरना, जाने कितना बड़ा पेट है इन गद्दारों का, इन भूखे नंगे देश के बिमारी से जूझते गरीबो की चीत्कार सुनाई नहीं देती, मुझे कोई बच्चा होटल पर बर्तन मांजते दीखता है अपनी माँ और अपनी भाई,बहनों के खातिर इस पड़ने खेलने की उम्र में, मेरा दिल इन देश के कर्णधार लुटेरों के प्रति घृणा से भर जाता है, बस अब तो देश केवल रामभरोसे (स्वामी रामदेव जी के ) है अशित पाठक
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