भाइयों और बहनो ,
अगर सम्पूर्ण विश्व के इतिहास को उठा कर देखे। विश्व इतिहास की बात छोड़ भी दे और केवल भारत के इतिहास की बात करें तो भारत के इतिहास मैं जितनी भी क्रांतियाँ हुई हैं जितना भी परिवर्तन हुआ है वह युवाओं ने किया है । भगवान राम की बात करें तो जब भगवान राम ने रावण का वध किया था तब भगवान राम युवा थे । भगवान कृष्ण की बात की जाए तो भगवान श्री कृष्ण ने जब कंस का वध किया तब भगवान श्री कृष्ण भी युवा थे। उसके बाद चाणक्य और चंद्रगुप्त की बात की जाए तो महानन्द का शासन पलट कर भारत को नई दिशा देने वाले चन्द्रगुप्त मोर्य भी युवा थे जब उन्होने महा नन्द का तखता पलटा । उसके बाद आगे की बात की जाए तो 1857 की क्रांति- जब अग्रेजों ने भारत पे कब्जा किया तब 1857 मे पहली क्रांति मैं भाग लेने वाले अधिकतर व्यक्ति युवा थे । 1857 की क्रांति के बाद अँग्रेजी साम्राज्य के सीने पर पहला बम फोड़ने वाला खुदिराम बोस ने मात्र 16 वर्ष की आयु मैं अपने आप को भारत माता के चरणों मैं बलिदान कर दिया। खुदी राम बोस के बाद करतार सिंह सरावा की बात की जाए तो मात्र 15 वर्ष की आयु मे उन्होने अपनी आहुती दी। उसके बाद लिस्ट ये कोई छोटी नहीं हे । उसके बाद यदि हम बात करें तो शहीद चन्द्र शेखर आजाद की, शहीद अशफाक उल्लाह खान की, शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की शहीद भगत सिंह की तो इन सबने 16-25 वर्ष की आयु मे अपनी आहुती दी और 1947 मैं जो हमे आधी अधूरी आजादी मिली उस आधी अधूरी आजादी की रक्षा करने मे चाहे वो भारत पाकिस्तान का युद्ध हो चाहे वो भारत चीन का युद्ध हो, जितने भी परमवीर चक्र मिलें हैं वो सारे परमवीर चक्र 16 से 30 वर्ष की आयु के सैनिकों को मिले हैं । तो भारत की आजादी की रक्षा मे भी सबसे बड़ा योगदान युवाओं का रहा। और युवाओं के आदर्श के रूप मैं शहीद भगत सिंह को माना जाता है । शहीद भगत सिंह ने 16 मई ,1925 को भारत मे एक पत्रिका छपती थी ‘मतवाला’ के नाम से । उस समय क्रांतिकारी अपने नाम से लेख नहीं लिखते थे । उस समय क्रांतिकारी दूसरों के नाम से लेख लिखते थे किसी जूठे नाम से लेख लिखते थे ताकि अँग्रेजी सरकार उनको पकड़ न पाये, तो बलवंत सिंग के नाम से मतवाला पत्रिका सन 1925 में शहीद भगत सिंह ने देश के युवको के नाम एक आहवाहन किया । युवको को उनकी शक्ति का अहसास करने के लिए शहीद भगत सिंह ने एक लेख लिखा था। उस लेख की कुछ पंक्तियाँ मैं आपके सामने पढ़्ना चाहता हूँ , पूज्य स्वामी जी महाराज के चरणों मैं समर्पित करना चाहता हूँ। आज 1925 क बाद 2012 में 87 वर्ष बाद भी भगत सिंह का वो लेख आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक हे और आज भी हर युवा को उस लेख को अपने हृदय में उतारने की आवश्यकता है । तो पूज्य स्वामी जी महाराज के चरणों में वह लेख समर्पित करता हूँ। भगत सिंह लिखते है देश के युवाओं को उनकी शक्ति का अहसास करवाते हुए कहते है कि ‘ युवा अवस्था मानव जीवन का वसंत काल है ,उसे पा कर मनुष्य मतवाला हो जाता है ऐसा लगता हे जैसे बड़ा गहरा नशा छा गया हे । युवा अवस्था ऐसी है जिसमे विधाता की दी हुई सारी शक्तियां सहस्त्र धाराएँ बन कर फुट पड़ती हैं । मतवाले हाथी की तरह निरंकुश , तूफानी वर्षा की तरह प्रचंड युवा अवस्था होती है । ज्वाला मुखी की तरह उछलंख , भैरवी संगीत की तरह मधुर , उज्जवल प्रभात की शोभा, संध्या की बेला , चंद्रमा की शीतलता , जेठ की तपती दुपहरी का ताप युवा अवस्था के भीतर ही है । युवा अवस्था ऐसी है जैसे किसी क्रांतिकारी की जेब में फटने को तैयार बंब का गोला । भगत सिंह आगे कहते है कि युवा अवस्था ऐसी है जैसे किसी क्रांतिकारी कि जेब मैं भरी हुई शत्रु के सीने में गोलियां उतरने के लिए तैयार पिस्टल । भगत सिंह आगे कहते हैं कि युवा अवस्था ऐसी है जैसे युद्ध क्षेत्र मैं खड़े हुए वीर के हाथ मैं शत्रु का शीश काटने के लिए तलवार। भगत सिंह आगे कहते हैं कि ये जो युवा अवस्था के ये जो 16 से 25 वर्ष कि आयु है , ये जो 10 वर्ष है ये अनमोल हैं यह हमैं जीवन में दोबारा नहीं मिलते और इन 10 वर्षों मैं भगवान , ईश्वर , विधाता संसार का सारा साहस युवक के शरीर मैं डाल देता है , हाड़ मांस के पुतले मैं बंद कर देता है । भगत सिंह आगे कहते हैं कि 16 से 25 वर्ष कि आयु में कोई व्यक्ति बड़ा कार्य नहीं कर सकता तो वह जीवन मैं कभी कोई बड़ा कार्य नहीं कर पाएगा। भगत सिंह आगे युवकों को उनकी शक्ति का अहसास करवाते हुए कहते है कि युवा अवस्था देखने मैं तो सश्यशामला वसुंधरा से भी शीतल है ,सुंदर है लेकिन उसके अंदर भूकंप कि भयंकरता छुपी हुई है । युवा अवस्था के बारे मैं आगे भगत सिंह सचेत भी करते हैं -वो कहते हैं कि युवा अवस्था मैं व्यक्ति के सामने दो ही मार्ग हैं – वह चाहे तो उन्नति के शिखर पर चढ़ सकता है और अगर वो गिरना चाहे तो गहरी खाई मैं गिर सकता है । युवक चाहे तो त्यागी बन सकता है चाहे तो विलासी बन सकता है, युवक चाहे तो देवता बन सकता है, युवक चाहे तो पिशाच बन सकता है , युवक चाहे तो आतंकवादी बन कर सारे संसार को भयग्रस्त कर सकता है । युवक अगर ठान ले तो योद्धा बन कर अपने राष्ट्र की रक्षा कर सकता है । भगत सिंह आगे कहते हैं की सारे संसार मैं युवक का साम्राज्य है।युवक के कीर्तिमानों से सारा इतिहास अटा पडा है । युवक रणचंडी के ललाट की रेखा है । युवक स्वदेश के यश की दुदुंभी है ,युवक ही स्वदेश का मेरु दंड है। भगत सिंह आगे कहते हैं कि युवक महाभारत के भीष्म पर्व की पहली ललकार के समान विकराल है । युवा अवस्था भक्त प्रहलाद के सत्यागृह की तरह दृढ़ और अटल है । भगत सिंह आगे कहते हैं कि किसी को बड़े दिल विशाल हृदय कि आवश्यकता हो बलिदान कि आवश्यकता हो तो उसे युवकों का दिल टटोलना पड़ेगा। भगत सिंह आगे कहते हैं अगर किसी को आत्म त्यागी वीर की आवश्यकता हो, किसी को राष्ट्र की रक्षा हेतु सेना बनाने के लिए योद्धाओं की आवश्यकता हो तो उसे युवको से मांगना पड़ेगा ,युवकों के सिवा और कहीं बलिदानी वीर नहीं मिल सकते । भगत सिंह आगे कहते है कि भगवान की अद्भुत रचना है युवक -युवक का उत्साह विचित्र होता है वह निश्चिंत है वह असावधान है वह बेपरवाह है, वह एक बार लगन लगा ले, एक बार संकल्प कर ले तो रात रात भर जागना उसके लिए बाएँ हाथ का खेल है । मीलों दूर तक पैदल चलना उसके दाएँ हाथ का खेल है। वह चाहे तो अपने देश और अपनी जाति को इतना ऊपर उठा दे , वह चाहे तो बड़े बड़े साम्राज्यों को गिरा दे । पतितों के उत्थान और संसार के उद्धार के सूत्र युवकों के ही हाथ मैं है । अगर रक्त की भेंट चाहिए तो युवक के सिवा कोई और नहीं दे सकता , अगर तुम् बलिदान चाहते हो तो तुम्हें युवक की और देखना होगा । प्रत्येक राष्ट्र व जाति का भाग्य विधाता युवक ही होता है। यह शहीद भगत सिंह ने आज से 87 साल पहले लिखा । शहीद भगत सिंह आगे कहते है कि सारे इतिहास के पन्नो को पलट कर देख लिजिए जितनी भी क्रांतियाँ हुई है वो सारी क्रांतियों का इतिहास युवकों के रक्त से लिखा गया है उनके बलिदान से लिखा गया है। सच्चा युवक – युवक की पहचान क्या है ? आगे भगत सिंह कहते हैं कि 16 से 25 वर्ष का हर युवक सच्चा युवक नहीं होता । सच्चे युवक की पहचान क्या है ? तो भगत सिंह कहते हैं कि सच्चा युवक बिना किसी भय के मृत्यु का आलिंगन करता है, सच्चा युवक संगीनों के सामने बैठ कर गीत गा सकता है , सच्चा युवक तोप के सामने आफ्ना सीना खोल कर रख सकता है, सच्चा युवक बेड़ियों की झंकार पर राष्ट्र गान गाता है, सच्चा युवक जेल की चक्की को पिसते हुए ऊदबोधन के मंत्र सुनता है, सच्चा युवक जेल की कल कोठरी के अंधकार मैं रहता हुआ स्वयं की युवा अवस्था की आहुती देता हुआ आपने राष्ट्र को अंधकार से निकलता है । आगे भगत सिंह युवाओं से आव्हान करते हैं -1925 मैं जो उन्होने आव्हान किया वो आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक है। तो भगत सिंह युवाओं से आव्हान करते हुए कहते हैं कि हे भारतीय युवक तू क्यों गफलत की नींद मैं बेखबर सो रहा है तू उठ आँखें खोल देख पूर्व दिशा से सूर्य उठ रहा है अब और अधिक मत सो और यदि सोना है तो मृत्यु के आगोश मैं सो कायरता की गोद मैं क्यों सोता है ? उठ मोह ममता को त्याग कर खड़ा हो जा तेरी माता तेरी प्रात: स्मरणीय तेरी परम वंदनीय तेरी जगदंबा , तेरी अन्नपूर्ना , तेरी त्रिशूल धारणी, तेरी सिंह वाहनी , तेरी सष्यशामला, तेरी भारत माता आज घायल पड़ी फुट फुट कर रो रही है अगर तेरे दिल मैं थोड़ी भी शर्म बाकी है तो उठ कर खड़ा हो जा और अपने माँ के दूध की लाज रख । ये भगत सिंह की कुछ पंक्तियाँ हैं जिनहे मैंने आपके सामने सुनाई और भगत सिंह का ये आहवान है हमे देश की रक्षा मैं हमे हमारे पूज्य स्वामी जी की नेत्रत्व मैं खड़े हो जाना चाहिए और अपने आप को आहूत कर देना चाहिए। पूज्य स्वामी जी महाराज के चरणों मैं कोटि कोटि नमन।
http://www.youtube.com/watch? v=KyBtAJLi4xQ http://www.youtube.com/watch?v=KyBtAJLi4xQ
अगर सम्पूर्ण विश्व के इतिहास को उठा कर देखे। विश्व इतिहास की बात छोड़ भी दे और केवल भारत के इतिहास की बात करें तो भारत के इतिहास मैं जितनी भी क्रांतियाँ हुई हैं जितना भी परिवर्तन हुआ है वह युवाओं ने किया है । भगवान राम की बात करें तो जब भगवान राम ने रावण का वध किया था तब भगवान राम युवा थे । भगवान कृष्ण की बात की जाए तो भगवान श्री कृष्ण ने जब कंस का वध किया तब भगवान श्री कृष्ण भी युवा थे। उसके बाद चाणक्य और चंद्रगुप्त की बात की जाए तो महानन्द का शासन पलट कर भारत को नई दिशा देने वाले चन्द्रगुप्त मोर्य भी युवा थे जब उन्होने महा नन्द का तखता पलटा । उसके बाद आगे की बात की जाए तो 1857 की क्रांति- जब अग्रेजों ने भारत पे कब्जा किया तब 1857 मे पहली क्रांति मैं भाग लेने वाले अधिकतर व्यक्ति युवा थे । 1857 की क्रांति के बाद अँग्रेजी साम्राज्य के सीने पर पहला बम फोड़ने वाला खुदिराम बोस ने मात्र 16 वर्ष की आयु मैं अपने आप को भारत माता के चरणों मैं बलिदान कर दिया। खुदी राम बोस के बाद करतार सिंह सरावा की बात की जाए तो मात्र 15 वर्ष की आयु मे उन्होने अपनी आहुती दी। उसके बाद लिस्ट ये कोई छोटी नहीं हे । उसके बाद यदि हम बात करें तो शहीद चन्द्र शेखर आजाद की, शहीद अशफाक उल्लाह खान की, शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की शहीद भगत सिंह की तो इन सबने 16-25 वर्ष की आयु मे अपनी आहुती दी और 1947 मैं जो हमे आधी अधूरी आजादी मिली उस आधी अधूरी आजादी की रक्षा करने मे चाहे वो भारत पाकिस्तान का युद्ध हो चाहे वो भारत चीन का युद्ध हो, जितने भी परमवीर चक्र मिलें हैं वो सारे परमवीर चक्र 16 से 30 वर्ष की आयु के सैनिकों को मिले हैं । तो भारत की आजादी की रक्षा मे भी सबसे बड़ा योगदान युवाओं का रहा। और युवाओं के आदर्श के रूप मैं शहीद भगत सिंह को माना जाता है । शहीद भगत सिंह ने 16 मई ,1925 को भारत मे एक पत्रिका छपती थी ‘मतवाला’ के नाम से । उस समय क्रांतिकारी अपने नाम से लेख नहीं लिखते थे । उस समय क्रांतिकारी दूसरों के नाम से लेख लिखते थे किसी जूठे नाम से लेख लिखते थे ताकि अँग्रेजी सरकार उनको पकड़ न पाये, तो बलवंत सिंग के नाम से मतवाला पत्रिका सन 1925 में शहीद भगत सिंह ने देश के युवको के नाम एक आहवाहन किया । युवको को उनकी शक्ति का अहसास करने के लिए शहीद भगत सिंह ने एक लेख लिखा था। उस लेख की कुछ पंक्तियाँ मैं आपके सामने पढ़्ना चाहता हूँ , पूज्य स्वामी जी महाराज के चरणों मैं समर्पित करना चाहता हूँ। आज 1925 क बाद 2012 में 87 वर्ष बाद भी भगत सिंह का वो लेख आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक हे और आज भी हर युवा को उस लेख को अपने हृदय में उतारने की आवश्यकता है । तो पूज्य स्वामी जी महाराज के चरणों में वह लेख समर्पित करता हूँ। भगत सिंह लिखते है देश के युवाओं को उनकी शक्ति का अहसास करवाते हुए कहते है कि ‘ युवा अवस्था मानव जीवन का वसंत काल है ,उसे पा कर मनुष्य मतवाला हो जाता है ऐसा लगता हे जैसे बड़ा गहरा नशा छा गया हे । युवा अवस्था ऐसी है जिसमे विधाता की दी हुई सारी शक्तियां सहस्त्र धाराएँ बन कर फुट पड़ती हैं । मतवाले हाथी की तरह निरंकुश , तूफानी वर्षा की तरह प्रचंड युवा अवस्था होती है । ज्वाला मुखी की तरह उछलंख , भैरवी संगीत की तरह मधुर , उज्जवल प्रभात की शोभा, संध्या की बेला , चंद्रमा की शीतलता , जेठ की तपती दुपहरी का ताप युवा अवस्था के भीतर ही है । युवा अवस्था ऐसी है जैसे किसी क्रांतिकारी की जेब में फटने को तैयार बंब का गोला । भगत सिंह आगे कहते है कि युवा अवस्था ऐसी है जैसे किसी क्रांतिकारी कि जेब मैं भरी हुई शत्रु के सीने में गोलियां उतरने के लिए तैयार पिस्टल । भगत सिंह आगे कहते हैं कि युवा अवस्था ऐसी है जैसे युद्ध क्षेत्र मैं खड़े हुए वीर के हाथ मैं शत्रु का शीश काटने के लिए तलवार। भगत सिंह आगे कहते हैं कि ये जो युवा अवस्था के ये जो 16 से 25 वर्ष कि आयु है , ये जो 10 वर्ष है ये अनमोल हैं यह हमैं जीवन में दोबारा नहीं मिलते और इन 10 वर्षों मैं भगवान , ईश्वर , विधाता संसार का सारा साहस युवक के शरीर मैं डाल देता है , हाड़ मांस के पुतले मैं बंद कर देता है । भगत सिंह आगे कहते हैं कि 16 से 25 वर्ष कि आयु में कोई व्यक्ति बड़ा कार्य नहीं कर सकता तो वह जीवन मैं कभी कोई बड़ा कार्य नहीं कर पाएगा। भगत सिंह आगे युवकों को उनकी शक्ति का अहसास करवाते हुए कहते है कि युवा अवस्था देखने मैं तो सश्यशामला वसुंधरा से भी शीतल है ,सुंदर है लेकिन उसके अंदर भूकंप कि भयंकरता छुपी हुई है । युवा अवस्था के बारे मैं आगे भगत सिंह सचेत भी करते हैं -वो कहते हैं कि युवा अवस्था मैं व्यक्ति के सामने दो ही मार्ग हैं – वह चाहे तो उन्नति के शिखर पर चढ़ सकता है और अगर वो गिरना चाहे तो गहरी खाई मैं गिर सकता है । युवक चाहे तो त्यागी बन सकता है चाहे तो विलासी बन सकता है, युवक चाहे तो देवता बन सकता है, युवक चाहे तो पिशाच बन सकता है , युवक चाहे तो आतंकवादी बन कर सारे संसार को भयग्रस्त कर सकता है । युवक अगर ठान ले तो योद्धा बन कर अपने राष्ट्र की रक्षा कर सकता है । भगत सिंह आगे कहते हैं की सारे संसार मैं युवक का साम्राज्य है।युवक के कीर्तिमानों से सारा इतिहास अटा पडा है । युवक रणचंडी के ललाट की रेखा है । युवक स्वदेश के यश की दुदुंभी है ,युवक ही स्वदेश का मेरु दंड है। भगत सिंह आगे कहते हैं कि युवक महाभारत के भीष्म पर्व की पहली ललकार के समान विकराल है । युवा अवस्था भक्त प्रहलाद के सत्यागृह की तरह दृढ़ और अटल है । भगत सिंह आगे कहते हैं कि किसी को बड़े दिल विशाल हृदय कि आवश्यकता हो बलिदान कि आवश्यकता हो तो उसे युवकों का दिल टटोलना पड़ेगा। भगत सिंह आगे कहते हैं अगर किसी को आत्म त्यागी वीर की आवश्यकता हो, किसी को राष्ट्र की रक्षा हेतु सेना बनाने के लिए योद्धाओं की आवश्यकता हो तो उसे युवको से मांगना पड़ेगा ,युवकों के सिवा और कहीं बलिदानी वीर नहीं मिल सकते । भगत सिंह आगे कहते है कि भगवान की अद्भुत रचना है युवक -युवक का उत्साह विचित्र होता है वह निश्चिंत है वह असावधान है वह बेपरवाह है, वह एक बार लगन लगा ले, एक बार संकल्प कर ले तो रात रात भर जागना उसके लिए बाएँ हाथ का खेल है । मीलों दूर तक पैदल चलना उसके दाएँ हाथ का खेल है। वह चाहे तो अपने देश और अपनी जाति को इतना ऊपर उठा दे , वह चाहे तो बड़े बड़े साम्राज्यों को गिरा दे । पतितों के उत्थान और संसार के उद्धार के सूत्र युवकों के ही हाथ मैं है । अगर रक्त की भेंट चाहिए तो युवक के सिवा कोई और नहीं दे सकता , अगर तुम् बलिदान चाहते हो तो तुम्हें युवक की और देखना होगा । प्रत्येक राष्ट्र व जाति का भाग्य विधाता युवक ही होता है। यह शहीद भगत सिंह ने आज से 87 साल पहले लिखा । शहीद भगत सिंह आगे कहते है कि सारे इतिहास के पन्नो को पलट कर देख लिजिए जितनी भी क्रांतियाँ हुई है वो सारी क्रांतियों का इतिहास युवकों के रक्त से लिखा गया है उनके बलिदान से लिखा गया है। सच्चा युवक – युवक की पहचान क्या है ? आगे भगत सिंह कहते हैं कि 16 से 25 वर्ष का हर युवक सच्चा युवक नहीं होता । सच्चे युवक की पहचान क्या है ? तो भगत सिंह कहते हैं कि सच्चा युवक बिना किसी भय के मृत्यु का आलिंगन करता है, सच्चा युवक संगीनों के सामने बैठ कर गीत गा सकता है , सच्चा युवक तोप के सामने आफ्ना सीना खोल कर रख सकता है, सच्चा युवक बेड़ियों की झंकार पर राष्ट्र गान गाता है, सच्चा युवक जेल की चक्की को पिसते हुए ऊदबोधन के मंत्र सुनता है, सच्चा युवक जेल की कल कोठरी के अंधकार मैं रहता हुआ स्वयं की युवा अवस्था की आहुती देता हुआ आपने राष्ट्र को अंधकार से निकलता है । आगे भगत सिंह युवाओं से आव्हान करते हैं -1925 मैं जो उन्होने आव्हान किया वो आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक है। तो भगत सिंह युवाओं से आव्हान करते हुए कहते हैं कि हे भारतीय युवक तू क्यों गफलत की नींद मैं बेखबर सो रहा है तू उठ आँखें खोल देख पूर्व दिशा से सूर्य उठ रहा है अब और अधिक मत सो और यदि सोना है तो मृत्यु के आगोश मैं सो कायरता की गोद मैं क्यों सोता है ? उठ मोह ममता को त्याग कर खड़ा हो जा तेरी माता तेरी प्रात: स्मरणीय तेरी परम वंदनीय तेरी जगदंबा , तेरी अन्नपूर्ना , तेरी त्रिशूल धारणी, तेरी सिंह वाहनी , तेरी सष्यशामला, तेरी भारत माता आज घायल पड़ी फुट फुट कर रो रही है अगर तेरे दिल मैं थोड़ी भी शर्म बाकी है तो उठ कर खड़ा हो जा और अपने माँ के दूध की लाज रख । ये भगत सिंह की कुछ पंक्तियाँ हैं जिनहे मैंने आपके सामने सुनाई और भगत सिंह का ये आहवान है हमे देश की रक्षा मैं हमे हमारे पूज्य स्वामी जी की नेत्रत्व मैं खड़े हो जाना चाहिए और अपने आप को आहूत कर देना चाहिए। पूज्य स्वामी जी महाराज के चरणों मैं कोटि कोटि नमन।
http://www.youtube.com/watch?
बिलकुल सटीक व सामरिक सत्य को आपने अवगत कराया है आपको धन्यवाद ....निवेदन यही करता हूं कि इस देश के लिय आप यूँ ही अच्छी अच्छी जानकरियों से हमें अवगत कराते रहेंगे .....पुन आपको सुनने कि उम्मीद के साथ
जवाब देंहटाएंअमर शहीद भगत सिंह की जवानी का यही जोश उसे फांसी के फंदे तक ले गया, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस कुछ अधिक आयु के थे तो उन्होंने अपनी सेना बनाई और अंग्रेजों के हाथ से भारत के काफी बड़े हिस्से से आज़ाद करवा लिया ! दुर्घटना के शिकार न हो गए होते तो आगे और भी बहुत कुछ करते ! गाँधी जी इन सबमें अधिक आयु के थे तो उन्होंने वह रास्ता अपनाया जिसमें शांति और अहिंसा के बल पर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर "राजी" किया ! तीनों का लक्ष्य एक था मगर तीनों का रास्ता उनकी आयु के अनुसार अलग-अलग था ! आज जरुरत इस बात की है कि तीनों से सीखकर भगत सिंह की देश पर खुद मर मिटने की भावना, नेताजी की तरह देश के दुश्मनों को मिटा देने की भावना और गाँधी जी की तरह संयम, शांति और और लोकतान्त्रिक तरीके से लड़ते हुए अपने लक्ष्य तक पहुँचने की सूझबूझ...इन तीनों तरीकों से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए ! उपरोक्त तीनों व्यक्ति और भी लाखों भारतीय जो देश के लिए लड़े वे सब हमारे महान पूर्वज थे ! मैं उन सब को नमन करता हूँ ! मैं स्वामी जी को भी नमन करता हूँ कि उन्होंने हमें देश की दुर्दशा के प्रति जागरूक किया ! मगर आगे क्या....? सिर्फ मोदी जी...क्या मोदी जी कोई जादूगर हैं जो किसी छड़ी से गिली-गिली करके देश को बदल डालेंगे ? मोदी जी परंपरागत राजनीति का ही एक चेहरा हैं जो सिर्फ इसलिए ज्यादा चमकदार लग रहा है क्योंकि सामने वालों का चेहरा पर कालिख पुती हुई है ! सच में कुछ बदलना है तो खुद आगे बदना होगा
जवाब देंहटाएं